डा राम मनोहर लोहिया फिलोसोफी

  
डा राम मनोहर लोहिया: जीवन वृत
जन्म- 23 मार्च 1910, अकबरपुर, जिला- फैजाबाद, उत्तरप्रदेश।

पिता- श्री हीरालाल, माता- श्रीमती चन्द्री।

शिक्षा- प्राथमिक अकबरपुर में, माध्यमिक मुम्बर्इ में, 1929 में बी.ए. (आनर्स), 1933 में पी. एच. डी., हम्बोल्ट विश्वविधालय, जर्मनी से।

1934- कांग्रेस समाजवादी पक्ष की स्थापना मे सहयोग पक्ष की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य।

1934-37 - कांग्रेस सोशलिस्ट पत्र के सम्पादक।

1936-39 - अ0भा0 कांग्रेस समिति के विदेश विभाग के प्रमुख।

7 जून, 1940 - द्वितीय महायुद्ध विरोधी प्रचार के कारण दो साल की सजा।

9 अगस्त, 1942 - भूमिगत, बम्बर्इ और कलकत्ता में गुप्त रेडियो केन्द्रों की स्थापना, अनेक भूमिगत पत्रों और पुसितकाओं का लेखन- प्रकाशन-प्रसारण।

मर्इ 1943 - नेपाल में जयप्रकाश नारायण के साथ गिरफ्तारक्रांतिकारियों के गुप्तकाल द्वारा मुक्त कराया गया।

10 मर्इ, 1944 - 21 महीनों की गुप्त भूमिगत गतिविधि के बाद बम्बर्इ में गिरफ्तारी, लाहौर और आगरा जेलों में रखा गया। इसी अवधि मे पिता की मृत्यु लेकिन पेरोल पर जेल से बाहर आने से इन्कार।

जून, 1946 - कांग्रेस के महामंत्री पद हेतु नेहरू का अनुरोध पद लेने से इन्कार।

18 जून, 1946 - मडगांंव (गोआ) में मनाही - हुक्म को तोड़ कर सभा, सत्याग्रह का आरम्भ, गिरफ्तारी।

29 जून, 1946 - पुन: मनाही - हुक्म तोड़कर गोवा में प्रवेश।

1946-47 - नेपाल आन्दोलन के पेरणास्रोत-नेपाली कांग्रेस की स्थापना, दार्जिलिंग मे गिरफ्तारी।

1946-47 - भारत-विभाजन से पहले और बाद में हिन्दू-मुसिलम दंगों में गांधी जी के साथ कलकत्ता, दिल्ली और नौआखाली मे शांति-स्थापना में योगदान।

फरवरी, 1947 - कांग्रेस समाजवादी पक्ष के कानपुर अधिवेशन के अध्यक्ष।

जून, 1947 - विभाजन के सम्बन्ध में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में विभाजन का सख्त विरोध।

मार्च, 1948 - कांग्रेस समाजवादी पक्ष द्वारा कांग्रेस-त्याग का निर्णय जिसमें निर्णायक भूमिका।

1949- उत्तर भारत के रैयत-संघर्ष का नेतृत्व।

मर्इ, 1949 - नेपाल दिवस के अवसर पर दिल्ली-प्रदर्शन का नेतृत्व और स्वाधीन भारत में पहली बार कैद डेढ़ महीनों के बाद रिहार्इ।

सितम्बर, 1949 - स्टाक होम के विश्व सरकार सम्मेलन में भागीदारी।

जनवरी, 1950 - रीवा-रियासत के संघर्ष में गिरफतारी।

फरवरी, 1950 - हिन्द किसान पंचायत के प्रथम अधिवेशन (रीवा, मध्यप्रदेश) के अध्यक्ष

जुलार्इ, 1951 - फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) के अन्तर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन भारत के प्रतिनिधि के रूप में शामिल यूगोस्लाविया, जापान और अमेरिका का दौरा

मार्च,1952 - लोहिया के प्रयास से एशियार्इ देशों के समाजवादियों का समाजवादी संगठन स्थापित करने का निर्णय।

मर्इ, 1952 - प्रथम आम चुनाव में समाजवादी पक्ष की हार की पृष्ठभूमि में पंचमढ़ी में पार्टी का अधिवेशन, लोहिया अध्यक्ष थे।

दिसम्बर, 1953 - इलाहाबाद में प्रजा समाजवादी पार्टी के प्रथम अधिवेशन में महामंत्री के पद पर लोहिया का चयन।

1954 - उत्तर प्रदेश में नहर, पानी, लगान वृद्धि के विरोध में आन्दोलन का लोहिया द्वारा नेतृत्व, गिरफ्तारी, दो महीनों के बाद रिहार्इत्रावनकोर कोचीन में नि:शस्त्र लोगों पर गोली चलाये जाने के विरोध में लोहिया द्वारा महामंत्री पद से इस्तीफा।

1955 - मणिपुर आन्दोलन के कारण गिरफतारी, कुछ दिनों बाद रिहार्इप्रजा समाजवादी पाटी्र के आन्तरिक कलह के कारण लोहिया के सदस्यता रदद 1 दिसम्बर, 1955 में समाजवादी पक्ष की स्थापना, हैदराबाद में अधिवेशन, लोहिया अध्यक्ष।

1957 - पाटी्र की ओर से अखिल भारतीय स्तर पर सत्याग्रह, लखनउ मे लोहिया की गिरफ्तारी एवं रिहार्इ।

1958 - नेफा सीमा प्रवेश पर पाबंदी के विरोध में सत्याग्रह में लोहिया की गिरफ्तारी एवं मुकित।

1960 - कानपुर के सरकारी सर्किट हाउस में रहने की मनाही के विरोध मे सत्याग्रह, सौ रुपयों का दंड, दंड भरने से इन्कार।

1961 - एथेन्स में आयोजित विश्व शांति परिषद में प्रतिनिधित्व।

1961 - पुर्तगाल से गोवा की आजादी लोहिया के नेतृत्व में।

1962 - तीसरे आमचुनाव में फूलपूर से नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़ा, हार हुर्इ।
1963 - चीन आक्रमण के उपरान्त भारत-चीन सीमा-प्रदेश का दौर, गिरफ्तारी और मुकित। उप चुनाव मे फरर्ूखाबाद से लोकसभा के लिए निर्वाचित।
1964- चौथी बार दो महीनों के लिए विदेश यात्रा, जैक्सन में रंग भेद के खिलाफ सत्याग्रह।
1965- पाँचवाी बार विदेश यात्रा, जर्मनी, रूस और काबुल की यात्रा, सरहदी गाँधी से मुलाकात, कच्छ-पाक सीमा का दौरा।
1966- उत्तर प्रदेश बंद के सिलसिले में कानपुर में गिरफ्तारी, सर्वोच्च न्यायालय से रिहार्इ।
1967- चौथे आम चुनाव में काँग्रेस हटाओ, देश बचाओ, का नारा। दस राज्यों मे। गैर कांग्रेसी संविद सरकारों की स्थापना। कन्नौज से संसद के लिए विजयी।
29 सितंबर, 1967- प्रोस्ट्रेट ग्लैंड की शल्य क्रिया के लिए दिल्ली के इरविन अस्पताल में भरती।
12 अक्टूबर, 1967- रात एक बजकर पाँच मिनट पर देहावसान। इंदिरा सरकार और परवर्ती जनता सरकार द्वारा नियुक्त जाँच समिति के निष्कर्षां के अनुसार रोगाणु विनाश व्यवस्था के अभाव तभी डाक्अरों की लापरवाही के कराण मृत्यु।